हमेशा ही मेरी अर्ज़ी तेरी मर्ज़ी
अभी है मेरी ख़ुद-गर्ज़ी तेरी मर्ज़ी
मुहब्बत में मिले थे अपनी मर्ज़ी से
नहीं था तब मेरी मर्ज़ी तेरी मर्ज़ी
तेरी ख़ातिर किए मैंने बहुत से जुर्म
तू कहती है हूँ मैं फ़र्ज़ी तेरी मर्ज़ी
मेरी मर्ज़ी अधूरी थी वहाँ तुझको
बहाने से छुए दर्ज़ी तेरी मर्ज़ी
मेरे दिल बाद घर में अब किसी और के
बना दे जन्नत-ए-अर्ज़ी तेरी मर्ज़ी
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