मेरा ख़्वाब ख़्वाबी नहीं है
हाँ तू अब निसाबी नहीं है
तुझे कल दिए थे जो भी फूल
बता क्यूँ गुलाबी नहीं है
ख़ुदा रहम वो बे-वफ़ा है
कोई और ख़राबी नहीं है
तू आ खोल क़िस्मत का ताला
ये मत कह कि चाबी नहीं है
बता क़र्ज़ में क्यूँ है तू जब
जुआरी शराबी नहीं है
मेरे शे'र पे वाह तो कर
मेरे हैं किताबी नहीं है
नमीं है जो लफ़्ज़ों में मेरे
ये आँसू है आबी नहीं है
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