मोहब्बत में हम को ख़सारा हुआ है
मगर फ़ाइदा दिल को सारा हुआ है
मेरे हौसले को न छाले दिखे हैं
कठिन मंज़िलों ने पुकारा हुआ है
जिसे सोच कर रो पड़े ज़िन्दगी भी
समय हमने ऐसा गुज़ारा हुआ है
मुझे ज़िंदगी से शिकायत नहीं है
कि जब से मेरा दिल तुम्हारा हुआ है
ग़ज़ल सब मेरी हाँ मुकम्मल हुई हैं
तेरी ओर से जब इशारा हुआ है
तेरे दिल में है दुसरा कौन पूछा
मेरा तब से उन से किनारा हुआ है
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