मुहब्बत से गले मिलते सभी तो खेलते होली
दिलों से दिल अगर मिलते कभी तो खेलते होली
सभी लगते यहाँ अपने मगर होते नहीं अपने
नहीं गिरगिट अगर दिखते तभी तो खेलते होली
सभी झूठे यहाँ पर हैं नहीं कोई यहाँ सच्चा
अगर सच्चे हमीं होते कभी तो खेलते होली
— Ajay Choubey















