यही इनकी हक़ीक़त है यही इनकी निशानी है
बदल जाना ज़ुबाँ से हुस्न की आदत पुरानी है
हमारा दर्द तुम सेे क्यूँँ बड़ा है जानते हो तुम
तुम्हें आदत भुलानी है हमें उल्फ़त भुलानी है
बुलाना याद से उसको मियाँ मेरे जनाज़े पर
उसे आँसू बहाने हैं मुझे सूरत दिखानी है
बदलता वक़्त जब देखूँ तुम्हारी याद आती है
सितम देखो घड़ी भी ये तुम्हारी ही निशानी है
लगाती है लबों से रोज़ तितली एक ही गुल को
बताती है वफ़ा उसकी यक़ीनन ख़ानदानी है
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