
इश्क़ में सब क़ुबूल करते हुए
मैं ने सोचा न भूल करते हुए
हँस के पूछी है ख़ैरियत उस ने
मन के काँटों को फूल करते हुए
इश्क़ ने सब तबाह कर डाला
इक जवानी को धूल करते हुए
उम्र का कुछ ख़याल करना था
काम सारे फ़ुज़ूल करते हुए
— Ankit gupta
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