
बात आगे बढ़ चुकी है बस ज़रा सी बात पर
उँगलियाँ उठने लगी हैं अब हमारी ज़ात पर
अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ ही तुम्हें करता हूँ याद
मैं ने क़ाबू पा लिया है नफ़्स पर जज़्बात पर
— Ashraf Ali
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