मिरे तो बस गिने चुने ही ख़्वाब थेबड़े हसीन और लाजवाब थेये काँटे तो मुझे ही चुभने थे कभीये मैं ने थाम जो रखे गुलाब थे— Swapnil Srivastava 'Bhola Lucknowi'