कोई मोहब्बत में ख़ुदा हो सकता है
ऐसा किसी का ज़ाविया हो सकता है
उसका बदन जो मंज़िल-ए-आख़िर नहीं
मेरे लिए इक रास्ता हो सकता है
ये ज़िंदगी रद्द-ओ-बदल का खेल है
सब कुछ यहाँ जादू-नुमा हो सकता है
इक इश्क़ जिसकी इंतिहा होती नहीं
इक मर्ज़ जो बे-इंतिहा हो सकता है
कोई गिला-शिकवा नहीं, कुछ भी नहीं
दोनों में इतना फ़ासला हो सकता है
कुछ ठोकरों का है यही हासिल मुझे
हर बात पे अब मशवरा हो सकता है
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