कोई इक भी जब न मेहमाँ पाया हम नेफिर तो अपना घर ही वीराँ पाया हम नेयूँ लगा जैसे बिछड़ के ख़ुश बहुत हैंदेखा तो ख़ुद को पशेमाँ पाया हम ने— Dileep Kumar