मेरे कॉलज में इक ऐसी लड़की है
जो मेरे ख़्वाबों में आया करती है
उसकी आँखों में दो झीलें ठहरी हैं
और वो हँसती है तो बारिश होती है
इस आफ़त में भूख से मरना ठीक नहीं
इस सेे आगे बस मौला की मर्ज़ी है
मैं उस से बातें करने को मरता हूँ
और वो मुझ सेे उखड़ी-उखड़ी रहती है
मेरा दुख है मेरे बच्चे भूखे हैं
और मेरी थाली में एक ही रोटी है
इश्क़ अर दौलत में कांटे की टक्कर है
देखना ये है अब वो किसको चुनती है
उस लड़के से दूर रहे तो अच्छा है
बाकी तो बस आगे उसकी मर्ज़ी है
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