pyaar-mohabbat theek nahin hai samjha kar | प्यार-मुहब्बत ठीक नहीं है समझा कर

  - Gaurav Singh

प्यार-मुहब्बत ठीक नहीं है समझा कर
इसकी लज्ज़त ठीक नहीं है समझा कर

तू भी पागल ताजमहल बनवाएगा
इतनी वहशत ठीक नहीं है समझा कर

मत कर उसको याद मेरे दिल जाने दे
अपनी क़िस्मत ठीक नहीं है समझा कर

मुझ सेे ख़ाली बात किया कर क़ुर्बत की
मुझ सेे क़ुर्बत ठीक नहीं है समझा कर

मत कर मेरे कहने से दरवाजे बंद
मेरी नीयत ठीक नहीं है समझा कर

हाथ पकड़कर एक नजूमी मेले में
बोला उल्फ़त ठीक नहीं है समझा कर

  - Gaurav Singh

Dil Shayari

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