socho KHud ka rona kaise rokega | सोचो ख़ुद का रोना कैसे रोकेगा

  - Gaurav Singh

सोचो ख़ुद का रोना कैसे रोकेगा
जब दुनिया का मालिक दुनिया देखेगा

कब आएगी लाश हमारी साहिल पर
कब दरिया का पानी नीचे उतरेगा

खींच रहा है नीच दुशासन साड़ी और
हमको लगता कान्हा आकर रोकेगा

क्या सोचा था दिल गूंगा है धोखा दो
गूंगा है पर गूंगा भी तो चीख़ेगा

सब करते हैं दिन में सौ सौ पाप मगर
सब कहते हैं जो बोएगा काटेगा

चाँद तलक पहुँचेगी अपनी बात कभी
या ऐसे ही तारे गिनते रहिएगा

पहले बात करेगा रिश्ते-दारी की
फिर रिश्तों के धागे-धागे खोलेगा

जान रहे थे भीष्म तभी तो चिंतित थे
जिसके खे
में में कान्हा हो जीतेगा

  - Gaurav Singh

Mehboob Shayari

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