ab meri maut ka samaan nazar aaya hai | अब मेरी मौत का सामान नज़र आया है

  - Khalid Azad

अब मेरी मौत का सामान नज़र आया है
दिल जो आबाद था वीरान नज़र आया है

एक मुद्दत से मेरे साथ था बन के हमदम
आज क्यूँ ग़म मेरा अंजान नज़र आया है

जब वो बिछड़ा तो दु'आ दे के गया ख़ुश रहना
आज ख़ुश देख, परेशान नज़र आया है

लौटना इश्क़ के रस्ते से नहीं था आसाँ
फिर भी इक क़ाफ़िला रिंदान नज़र आया है

रात तन्हाई में फिरता ही रहा आवारा
आँख खुलने पे ये ज़िंदान नज़र आया है

  - Khalid Azad

Maut Shayari

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