यहाँ पे सबको ही आख़िर ज़वाल आना है
तुम्हारे हुस्न पे ये भी कमाल आना है
इस एक ख़ौफ़ से मैं कुछ भी सोचता ही नहीं
कि हर ख़याल में तेरा ख़याल आना है
बिछड़ गया वो, तो कब तक रहूॅंगा मैं तन्हा
हमारे सामने ये भी सवाल आना है
मुहब्बतों में जो मिलने लगे वफ़ा का सिला
तुम्हारे हाथ तो बस इक रूमाल आना है
मैं तेरे शहर को जिस दिन भी छोड़ जाऊंगा
तुम्हारे रुख़ पे फिर उस दिन मलाल आना है
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