
मिन्नतें करता था रुक जाओ मेरा कोई नहीं
मेरे रोके से मगर कौन रुका कोई नहीं
बेवफ़ाई को बड़ा जुर्म बताने वाले
याद है तू ने भी चल छोड़ हटा कोई नहीं
— Khan Janbaz
Other sher from the same pen
Shers of bewafai shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling