लोग जो तैयार थे बस नोच खाने के लिए
मर गया हूँ तो तुले हैं सब जगाने के लिए
कट गया फिर भी निभाई है मोहब्बत पेड़ ने
थी चिता पर सिर्फ़ लकड़ी साथ जाने के लिए
हो गया कोई अमर बस जिस्म अपना सौंप कर
हैं खड़ीं लाशें सभी मिट्टी जलाने के लिए
देर से वो ख़्वाब में आया था मिलने के लिए
मैं भी देरी कर गया पलकें उठाने के लिए
जीते-जी पूछा नहीं माँ बाप को खाना कभी
कर रहे हैं श्राद्ध अब उनको खिलाने के लिए
मार कर तुम दूसरों का हक़ उठा लाए अगर
नर्क भी फिर कम पड़ेगा छटपटाने के लिए
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