मैं ख़ुद को ही समझाता हूँ, हाँ ये ग़लती मेरी है
पर खोने से घबराता हूँ, हाँ ये ग़लती मेरी है
तुझको खोने की आँधी में जब मन बुझ सा जाता तो
फिर दिल को मैं सुलगाता हूँ, हाँ ये ग़लती मेरी है
बात हुई? कैसी है वो? कुछ पूछा मेरे बारे में?
बस इनको ही दोहराता हूँ, हाँ ये ग़लती मेरी है
कहीं नहीं मिलती तू फिर, दिल अपना तुझको जान तभी
फिर ख़ुदस मैं बतियाता हूँ, हाँ ये ग़लती मेरी है
तेरे सपने सोने से पहले भर जाते आँखों में
सिरहाने फिर टपकाता हूँ, हाँ ये ग़लती मेरी है
सभी बहा कर सपने सिरहाने, भारी पलकें गिरतीं
तो सामने तुझे पाता हूँ, हाँ ये ग़लती मेरी है
मैंने बस इतना चाहा, हो जीवन तेरे साथ सभी
पर पागल मैं कहलाता हूँ, हाँ ये ग़लती मेरी है
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