आज फिर घर याद में उसकी सजाया
मैंने दिल फिर अपना कुछ ऐसे दुखाया
ज़िंदगी को छोड़कर जब से गया है
अब यहाँ लगता है हर कोई पराया
हम ने ख़ुदस भी ज़ियादा उसको चाहा
फेर कर उसने नज़र हमको रुलाया
मुझको झूठा उसने ऐसे कैसे बोला
यार उसने दिन भी कैसा ये दिखाया
उसके मुश्किल रास्तों में साथ मैं था
पर मुझे ही रस्ते का काँटा बताया
जब उठी उसकी जो डोली सामने से
जश्न लोगों ने यक़ीनन फिर मनाया
वो ख़ुशी से ग़ैर बाहों में चली है
इस तरह मेरे लबों को है सुखाया
अब अकेले यार तन्हा चलता हूँ मैं
जब से अपना रंग ये उसने दिखाया
Read Full