इक खिला फूल मुरझा गया है यहाँ
माँ के बच्चे को मारा गया है यहाँ
शा'इरी को सहारा मिला ही नहीं
बस उसे आज़माया गया है यहाँ
पेड़ की छाँव से दोस्ती थी मगर
धूप से घर बनाया गया है यहाँ
बाग़ सूने हैं पत्ते भी ख़ामोश हैं
खेल बच्चों का छीना गया है यहाँ
राब्ते सब इमोजी में सिमटे हुए
दौर कैसा मियाँ आ गया है यहाँ
हाथ में फोन है मन उदासी भरा
ये ग़ज़ब हाल देखा गया है यहाँ
इक नदी रो रही थी यूँँ चुपचाप से
जैसे बच्चा रुलाया गया है यहाँ
झील सूखी है जंगल भी वीरान है
क्यूँ ज़मीं को मिटाया गया है यहाँ
ज़िंदगी की हक़ीक़त ललित है यही
हर क़दम पर गिराया गया है यहाँ
ज़िंदगी यार अवसाद में है ललित
रस्सी पंखा गले आ गया है यहाँ
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