
चराग़-ए-रौशनी हो कर दर-ए-दिल तक न पहुँचा हूँ
नज़र में हुस्न की यारो अभी तक भी बुझा सा हूँ
ख़बर करना ज़रा क़ासिद हसीं साँसों की धड़कन को
हवा दामन से गर दे वो महकता मैं उजाला हूँ
— Maviya abdul kalam khan
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