मीर के ऊला से ग़ालिब का सानी जोड़ दियाबोला ये शे'र सुनो दाद चाहिए मुझ कोकोई भी दर्द या फिर ज़ख़्म अता करो यारोंशा'इरी के लिए इमदाद चाहिए मुझ को— Amaan mirza