करवट तमाम रात बदलना पड़ा मुझेइक बे-वफ़ा की याद में जलना पड़ा मुझेइक सोई हुई क़ौम जगाने के वास्तेतलवार ले के घर से निकलना पड़ा मुझे— Muneer shehryaar