ghar men kuchh aur izafa hua taameer ke baad | घर में कुछ और इज़ाफ़ा हुआ तामीर के बाद

  - Navin Joshi

घर में कुछ और इज़ाफ़ा हुआ तामीर के बाद
एक दीवार बनी थी तेरी तस्वीर के बाद

ख़्वाब लगता हूँ तो फिर देख मुझे लुत्फ़ उठा
मैं दिखाई नहीं दूँगा तुझे ता'बीर के बाद

बाद ज़ंजीर के भी मैं न रिहा हो पाया
पाँव लोहे के हुए थे मेरे ज़ंजीर के बाद

मेरी तक़दीर ने मुझको ही सिपाही रक्खा
मैं अकेला ही लड़ा ख़ुद से भी तक़दीर के बाद

जंग के बाद यहाँ अम्न भी तो आएगा
हल चलाना भी सिखाना मुझे शमशीर के बाद

  - Navin Joshi

Sad Shayari

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