जैसे तैसे गुज़र बसर कर लूँगा मैंधीरे धीरे दिल में घर कर लूँगा मैंसाथ निभाना तुम सीते सा प्रिय मेराप्रेम में ख़ुद को भी रघुबर कर लूँगा मैं— Pankaj murenvi