तेरे शहर से मेरा भी नाता है कोईमुझ सेा यूँ ही नहीं यहाँ आता है कोईतेरे बा'द मैं गायब सा हूँ इक मुझमें हीमुझ को तेरे सिवा कहाँ भाता है कोई— Pankaj murenvi