"चाय"
तेरे मेरे मिलन की बात कुछ ऐसी है
थकान और चाय के कप जैसी है
जब भी ज़िन्दगी से थक हार जाऊँ मैं
अपनी बाहों में जगह देना मुझ को
और जब जाने की जिद करुँ तो
एक कप चाय और बना देना मुझ को
— Pritam sihag
तेरे मेरे मिलन की बात कुछ ऐसी है
थकान और चाय के कप जैसी है
जब भी ज़िन्दगी से थक हार जाऊँ मैं
अपनी बाहों में जगह देना मुझ को
और जब जाने की जिद करुँ तो
एक कप चाय और बना देना मुझ को
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