jidhar jidhar ko bhi kariye nazar udaasi hai | जिधर जिधर को भी करिए नज़र उदासी है

  - Shajar Abbas

जिधर जिधर को भी करिए नज़र उदासी है
इधर उधर मेरे घर में शजर उदासी है

हमें निकाल के सीने से दिल दिखाना पड़ा
सवाल उसने जो पूछा किधर उदासी है

मुझे मलाल नहीं अपनी इस उदासी का
अगर उदासी की पेशानी पर उदासी है

किया विसाल का जब ज़िक्र उसने मैंने कहा
यहाँ पे ख़ुशियों की मत बात कर उदासी है

उदास होके कहा क्या गिला करूँँ आख़िर
मिरा नसीब ही जब ये शजर उदासी है

  - Shajar Abbas

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