mirii judaai men tum KHud ko sogwaar karo | मिरी जुदाई में तुम ख़ुद को सोगवार करो

  - Shajar Abbas

मिरी जुदाई में तुम ख़ुद को सोगवार करो
तमाम ज़िंदगी अश्कों का कारोबार करो

ये कार-ए-ख़ैर है ये कार बार बार करो
शजर के साए में बैठो शजर से प्यार करो

निगाह-ए-इश्क़ से मत देखो सिर्फ़ मेरी तरफ़
गले लगाओ मुझे मुझ पे जाँ निसार करो

अरे जवानों अगर इश्क़ है जवानी से
हमारी मानों हसीनों को दर किनार करो

हुआ है इश्क़ हमें एक शाहज़ादी से
जनाब-ए-क़ैस सा सब हमको संग सार करो

हमारे माथे को नाज़ुक लबों से चूम के तुम
हसीन शख़्स हमें अपना क़र्ज़-दार करो

  - Shajar Abbas

Ishq Shayari

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