दिल की बस्ती में मनादी दे रहा है ये सदाआइए अहल-ए-नज़र सब तेज़ी से आ जाइएदेखिए जलता हुआ आँखों से ख़्वाबों का बदनसीने सर को पीट कर सब रोइए चिल्लाइए— Shajar Abbas