हम हैं के इश्क़ का इज़हार किए जाते हैंऔर इक वो हैं के इनकार किए जाते हैंतोड़कर दिल वो शजर आज हमारा देखोख़ाना-ए-काबा को मिस्मार किए जाते हैं— Shajar Abbas