जो दरमियान है दोनों के साफ़ करना हैकिया है इश्क़ तो फिर एतिराफ़ करना हैपहुँच के कूचे में महबूब के शजर मैं नेतमाम रात ही घर का तवाफ़ करना है— Shajar Abbas