रक़ीब कर लिया ख़ुश हो के दुश्मन-ए-जाँ कोयूँ इंतिक़ाम-ए-मोहब्ब्त लिया गया हम सेहमारे दिल पे क़यामत गुज़र गई मुर्शिदहमारा चाहने वाला जुदा हुआ हम से— Shajar Abbas