vo neech kaam karne se ghabraaya hi nahin | वो नीच काम करने से घबराया ही नहीं

  - shaan manral

वो नीच काम करने से घबराया ही नहीं
दिल तोड़ के कई कभी पछताया ही नहीं

बख़्शीश तेरे सारे ही रक्खा सँभाल कर
चाहे वो ग़म ही क्यूँँ न हो ठुकराया ही नहीं

मिलने के वास्ते मैं कड़ी धूप में जला
आऊँगा कह के यार मेरा आया ही नहीं

उम्मीद से बड़ी मैं उसे देखता रहा
लेकिन वो शख़्स मुझ पे तरस खाया ही नहीं

झलके मिरी निगाह में तस्वीर बस तिरी
मैं भा के इसलिए किसी को भाया ही नहीं

दिल ढूँढता रहा उसे ता-उम्र दर-ब-दर
जो आते आते हाथ मेरे आया ही नहीं

ये ग़म क़दम क़दम पे मिरे साथ चल रहा
कैसे कहूँ मेरा कोई हम-साया ही नहीं

  - shaan manral

Bhai Shayari

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