हमेशा शा'इरी ही गुनगुनाना जानते हो क्या
हुनर इसके सिवा कोई दिखाना जानते हो क्या
न जाने क्यूँँ मिरे दिल को हमेशा ज़ख़्म देते हो
बताओ ज़ख़्म पर मरहम लगाना जानते हो क्या
किसी के इश्क़ में हद से गुज़र जाने से कुछ हटकर
लुटाना इश्क़ में क़ारूँ ख़ज़ाना जानते हो क्या
किसी माशूक़ को घाइल बनाने के लिए अक्सर
नज़र से तीर हँसकर तुम चलाना जानते हो क्या
सहर के इश्क़ की दुनिया में जीने के लिए घुटकर
किसी को इश्क़ में पागल बनाना जानते हो क्या
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