करता है मुझ सेे रोज़ तू तकरार शुक्रिया
इस
में महक रहा है तेरा प्यार शुक्रिया
जैसे लुटा रहा है वो मुझ पर मुहब्बतें
करती हूँ दिल से उसका में सौ बार शुक्रिया
उसकी मुहब्बतों पे लुटा दूँ ये ज़िन्दगी
जिसने दिया है मुझको ये संसार शुक्रिया
हाज़िर है मेरी जान भी मुर्शिद तेरे लिए
तूने किए हैं स्वप्न ये साकार शुक्रिया
मुझको तो शा'इरी का नहीं था कोई शऊर
अब पा लिया मक़ाम ये सरकार शुक्रिया
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