फिर थोड़ी ही देर में ये बिस्तर मक़्तल होना है
इस सेे पहले ही क़ातिल, तुझको ओझल होना है
जाओ कोई शिकवा नईं, अपनी अपनी मर्ज़ी है
तुझको आँसू होना है, मुझको काजल होना है
हूर क़तारों में लगकर फिर कहती थी ये मुझ सेे
मुझको पागल होना है, मुझको पागल होना है
ख़्वाब बुना करती थी बाप बनाने के मुझको जो
ग़ज़ब सितम है उसके बच्चों का अंकल होना है
हम गुल से भी टकराएँ तो चोट आएगी 'लाजो
तेरी ख़ातिर तो पत्थर को भी मख़मल होना है
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