tabhi to kaam mila tha kisi ko khone ka | तभी तो काम मिला था किसी को खोने का

  - Vishnu virat

तभी तो काम मिला था किसी को खोने का
मुझे ही इल्म था बस ठीक ठाक रोने का

कई बरस की मशक़्क़त के बाद उस दिल में
जुगाड़ भी हुआ तो सिर्फ़ एक कोने का

यूँँ एक दरिया को खलती है मेरी तैराकी
तरीक़ा सीख रहा है मुझे डुबोने का

खिलौना टूट गया बोल भी न पाया कुछ
उसे भी फ़िक्र नहीं क्या हुआ खिलौने का

कल एक फूल चमेली का मर गया आख़िर
बहुत दबाव था उस पर गुलाब होने का

वो अप्सरा भी रहे और वफ़ा भी करती हो
हिरन ही चाहिए मुझको हिरन भी सोने का

  - Vishnu virat

Dil Shayari

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