ज़ाहिर तुझे भी हो जाएगा ये हाल मेरा
बाहर आ जाए जो अंदर का उबाल मेरा
जीना तो ज़िंदगी कर बैठी मुहाल मेरा
फिर भी तू देख जीने का ये कमाल मेरा
मैं चाहता यही था सब चाह ख़त्म हो अब
फिर चाहकर तुम्हें बदला ये ख़याल मेरा
उसने दिया यूँँ होंठो से हर जवाब अपना
होंठो पे ही रहा फिर हर इक सवाल मेरा
शक है तुझे अगर ये अब भी गुदाज़ है दिल
तो सीने से कभी ये पत्थर निकाल मेरा
तू मुझको मुक्त कर दे इन सारे बंधनों से
ये मोह माया का दे अब तोड़ जाल मेरा
Read Full