पक्के घर कहने को ही पक्के थे
वे तो कच्चे घरों से कच्चे थे
तब नहीं चलती थी दवा-गोली
हम तो कंगाली में ही अच्छे थे
ज़िंदगी अपनी ख़ुद तबाह की है
मेरे कमबख़्त कान कच्चे थे
तुम तो सच बोल सकते थे भाई
मेरे घर में तो बाल-बच्चे थे
शहर घुसपैठ किस तरह करता
गाँव जाने के मार्ग कच्चे थे
शहर को गाँव रोकता कब तक
शहर के पास ढेर गच्चे थे
इस धरा पर ही स्वर्ग बसता था
जब तलक दिल हमारे सच्चे थे
दरमियाँ आ गई हैं दीवारें
घर बसाने से पहले अच्छे थे
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