भेदता किरणों से अपनी तीरगी कोसूर्य उठता आ रहा देखो उफ़ुक़ परजीतनी है तुम को गर हर इक चुनौतीटांग दो डर को उठा जज़्बे की हुक पर— Ajeetendra Aazi Tamaam