मुक़र्रर दिन नहीं तो लम्हा-ए-इमकान में आओअगर तुम मिल नहीं सकती तो मेरे ध्यान में आओबला की ख़ूब-सूरत लग रही हो आज तो जानाँमुझे इक बात कहनी थी तुम्हारे कान में.. आओ— Darpan