देखना इस तरह से चाहूँगा
अपनी दुल्हन बना के लाऊँगा
वो समझती रही मुझे पागल
मैं ही पागल उसे बनाऊँगा
क्या हुआ छोड़ क्यूँ रही मुझको
बोला शौहर कि मैं बताऊँगा
भूलने का वो कर गई वा'दा
याद मैं बार-बार आऊँगा
आँख से ख़ून बह रहा जिस
में
ऐसी तस्वीर मैं बनाऊँगा
या तो दरिया के पार आऊँगा
या तो दरिया में डूब जाऊँगा
जिस तरह आपने रुलाया है
एक दिन आपको रुलाऊँगा
याद रखना ये बात 'अफ़ज़ल' की
मर के इक दिन तुम्हें दिखाऊँगा
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