न पूछो मुझ सेे मिरी कहानी के बारे में
के वाक़िआ ये है बे-दहानी के बारे में
जो सोचता है जुदा नहीं वो होगी कभी
उसे बताओ कुछ ना-गहानी के बारे में
कि शाहज़ादी बताया पूछा जिसने कभी
मुझे तिरे नाम के मआनी के बारे में
के चल रही थी मिरी कहानी जिसके सबब
वो ख़ुद था अनजान उस कहानी के बारे में
मैं और क्या रखता उसके आगे दिल के सिवा
जब उसने पूछा ही था निशानी के बारे में
कि इक मोहब्बत में पढ़के ख़त्म हो जाती है
यही बता सकता हूँ जवानी के बारे में
मिरे बिना ऐक पल जो रह नहीं सकती थी
मैं क्या बताऊं अब उस दिवानी के बारे में
बहुत तजुर्बा मिला है इश्क़ से मुझको भी
करो न बातें महर निभानी के बारे में
जो तेरी आँखों से फ़ैज़ चश्मा बन फूटा था
सभी बताते हैं उस कहानी के बारे में
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