
चल रही जुमलों से अब सरकार ही है
सब को तो मेहनत की अब दरकार ही है
तुम नहीं यारो परखना वक़्त को तो
वक़्त के आगे तो सब बेकार ही है
— Ajay Kishor
Other sher from the same pen
Shers of berozgari shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling