हम को नहीं है कुछ भी ख़बर फिर भी हाँ मगरतेरे बगैर जीना का सोचा, तो रो दिएपूछा जो उस ने रोते हो 'अख़्तर' भला तुम क्यूँअब बात आई रोने की, सोचा, तो रो दिए— Parwez Akhtar