
मुद्दत में बहार आई है सो लोग भी ख़ुश हैं
मैं ख़ुश हूँ अगर शहर में दो लोग भी ख़ुश हैं
अपना तो ये आलम है कि ढलती ही नहीं शाम
अल्लाह करें ख़ुश रहें जो लोग भी ख़ुश हैं
— Akhtar Usman
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