lab pe aati hai dua ban ke tamannaa mirii | लब पे आती है दु'आ बन के तमन्ना मेरी

  - Allama Iqbal

लब पे आती है दु'आ बन के तमन्ना मेरी
ज़िंदगी शमाकी सूरत हो ख़ुदाया मेरी!
दूर दुनिया का मिरे दम से अँधेरा हो जाए!
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाए!
हो मिरे दम से यूँंही मेरे वतन की ज़ीनत

जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत
ज़िंदगी हो मिरी परवाने की सूरत या-रब
इल्म की शमासे हो मुझ को मोहब्बत या-रब
हो मिरा काम ग़रीबों की हिमायत करना
दर्द-मंदों से ज़ईफ़ों से मोहब्बत करना
मिरे अल्लाह! बुराई से बचाना मुझ को
नेक जो राह हो उस रह पे चलाना मुझ को

  - Allama Iqbal

Ujaala Shayari

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