जो भी आते हैं वो बस तोड़ के चल देते हैं
कैसे समझाऊँ शजर कैसे ये फल देते हैं
ख़ुशबू होती है तो सीने से लगाए रखते
सूख जाएँ तो ये फूलों को मसल देते हैं
मैंने देखा है यहाँ रहते हुए दुनिया में
अपने रहबर ही यहाँ रस्ता बदल देते हैं
होता आया है मिरे साथ में ऐसा अक्सर
टूटते ख़्वाब ही नींदों में ख़लल देते हैं
तुमने बदले में दिया कुछ भी नहीं है उसको
देने वाले तो मोहब्बत में महल देते हैं
कोई क्या ख़ाक भरोसा ही करे अपनों पर
अपने पैरों से ही अपनों को कुचल देते हैं
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