चार भित्ति, ज़मीं, कुतुब, इक छतकुछ गज़ाला के, कुछ सबा के ख़तघर में क़ब्ज़ा जमा के बैठे हैंहिज्र,मातम, चुभन, कसक, ख़ल्वत— A R Sahil "Aleeg"